राज्यपाल कौन होता है | राज्यपाल की नियुक्ति कैसे होती है

नमस्कार दोस्तों आशा करते है की आप अच्छे होंगे तथा अपने कार्यक्षेत्र में अच्छा काम कर रहे होंगे, दोस्तों आज के इस लेख में हम राज्यपाल तथा उससे जुड़े हुए कुछ महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा कर उन्हें समझने का प्रयत्न करेंगे। दोस्तों हमारे भारतीय संविधान में सरकार चलाने के लिए बहुत से पदों में लोगों को नियुक्त करने की प्रथा है, इन्हीं पदों में से एक पद राज्यपाल (या गवर्नर) का होता है जो केंद्रीय तथा राज्य सरकार दोनों के लिए ही आवश्यक है, राज्यपाल किसी भी राज्य का सबसे बड़ा सरकारी अधिकारी होता है और इसी के द्वारा उस राज्य के मुख्यमंत्री को शपथ भी दिलाई जाती है।

राज्य में जितने भी निर्णय लिए जाते है वो उस राज्य के राज्यपाल के नाम पर लिए जाते है, जो व्यक्ति राज्यपाल होता है वो उस राज्य में केंद्रीय सरकार के अधीन रहकर काम करता है। राज्यपाल बनना भी बहुत कठिन काम होता है, इसके लिए आपको संविधान के कुछ शर्तों पर खरा उतरना होगा, एक राज्यपाल जिस राज्य में काम करता है वह वहाँ का राष्ट्रपति कहलाता है तथा एक राज्यपाल अपने राज्य में उपस्थित हर एक विश्ववविद्यालय का दल पति भी होता है। आइये अब हम इस विषय पर विस्तार पूर्वक चर्चा करते है।

राज्यपाल कौन होता है?

दोस्तों राज्यपाल को हम अंग्रेजी में Governor के नाम से भी जानते है। दोस्तों जैसा की हमने आपको ऊपर बताया एक राज्यपाल किसी भी राज्य का सबसे बड़ा सरकारी अधिकारी, राज्य का राष्ट्रियपति, विश्वविद्यालओं का दल पति होता है। दोस्तों जिस तरह हमारे भारत देश में राष्ट्रपति भारत सरकार का सर्वोच्च अधिकारी तथा देश का प्रथम नागरिक होता है, लेकिन देश चलने की ज़िम्मेदारी प्रधान मंत्री के पास होती है, ठीक उसी प्रकार एक राज्यपाल किसी भी राज्य का सबसे बड़ा सरकारी अधिकारी होता है, लेकिन राज्य चलने की पूरी ज़िम्मेदारी उस राज्य के मुख्य मंत्री की होती है। एक राज्यपाल का पद पाने के लिए आपको संविधान के बहुत सरे शर्तों पर खरा उतरना पड़ेगा, आइये अब हम उन शर्तो के बारे में बात करते है।

राज्यपाल का चयन कैसे होता है?

राज्यपाल के चयन के लिए हमारे संविधान के अनुच्छेद 157 में कुछ अहम शर्तों पर चर्चा की गयी है, जिस पर उम्मीदवार को खरा उतरना पड़ता है। शर्तें निम्नलिखित है,

• आपका भारत का नागरिक होना अनिवार्य है।
• आपकी उम्र का 35 वर्ष होना अनिवार्य है।
• आपको विधान सभा का सदस्य चुने जाने योग्य होना पड़ेगा।
• आपको पागल या दिवालिया घोषित न किया गया हो।
• आप केंद्रीय या राज्य सरकार के अधीन किसी पद पर सार्वजनिक उपक्रमों का लाभ न उठा रहे हो।

राज्यपाल के नियुक्त होने के लिए हमारे संविधान के अनुच्छेद 155 के अनुसार एक राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। इसी के साथ साथ इस अनुच्छेद में कुछ शर्तें भी लिखी है जिन्हें ध्यान में रखना अनिवार्य है। शर्तें निम्नलिखित है,

• जिस राज्य में राज्यपाल की नियुक्ति होनी है वह व्यक्ति उस राज्य का नहीं होना चाहिए।
• राज्यपाल के चयन से पहले उस राज्य में मुख्यमंत्री के साथ इस विषय में विचार परामर्श किया जाना चाहिए।

दोस्तों अगर किसी को भी राज्यपाल के पद पर असिन होना है तो उसे पहले इन शर्तों को पूरा करना पड़ेगा, तभी जाकर कोई भी व्यक्ति राज्यपाल बनने के योग्य बनता है। राज्यपाल बनने के बाद आप उस राज्य के सबसे बड़े सरकारी अधिकारी बन जाते है, जो उस देश के केंद्रीय सरकार के अधीन रहकर किसी भी राज्य में राज करता है, हालाँकि एक राज्यपाल केवल नाममात्र का अधिकारी होता है, क्यूंकि राज्य को चलने की ज़िम्मेदारी मुख्यमंत्री की होती है। दोस्तों अब हम ये जान चुके है की राज्यपाल का पद कितना बड़ा तथा महत्वपूर्ण पद होता है, तो चलिए अब हम ये जानते हैं की इस अधिकारी को शपथ दिलाने का कार्य किसके द्वारा संपन्न किया जाता है।

राज्यपाल की शपथ

जैसा हमने आपको ऊपर बताया है की एक राज्यपाल ही उस राज्य के मुख्यमंत्री का चयन करता है, तथा उसे शपथ दिलाने का कार्य भी करता है, ऐसे में ये जानना और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है कि आखिर एक राज्यपाल को शपथ दिलाने का कार्य कौन करता है।

दोस्तों जिस तरह राष्ट्रपति को शपथ हमारे उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) के मुख्य न्यायधीश द्वारा संपन्न कराया जाता है ठीक उसी प्रकार, एक राज्यपाल को शपथ उस राज्य के सर्वोच्च न्यायालय (High Court) के मुख्य न्यायधीश द्वारा शपथ ग्रहण कराया जाता है। इसके पीछे का मुख्य उद्देश्य यह दिखाना भी है की हमारे भारत देश में संविधान को सबसे ऊपर माना जाता है, इसलिए इसकी रक्षा तथा इसका पालन करवाने वाले न्यायधीश द्वारा इन दोनों मुख पदों पे आसीन होने वाले व्यक्तियों की शपथ स्वयं न्यायधीश संपन्न कराते हैं। चलिए दोस्तों अब हमें यह भी मालूम हो चुका है की राज्यपाल को शपथ कौन दिलाता है, तो चलिए अब हम राज्यपाल के कार्यकाल के बारे में जानने का प्रयत्न करते हैं।

राज्यपाल का कार्यकाल

दोस्तों मुख्यतः एक राज्यपाल का कार्यकाल भी बाकी सारे मंत्रियों के जितना ही होता है (5 वर्ष), लेकिन कुछ परिस्थितियों में राज्यपाल का कार्यकाल बढ़ाया या घटाया भी जा सकता है, लेकिन ऐसा होने के आसार बहुत कम ही होते है। एक राज्यपाल का पद राष्ट्रपति द्वारा मंत्रिमंडल के सुझाव पर उससे छीना भी जा सकता है। अगर कोई राज्यपाल अपना कार्यकाल पूरा कर लेता है, और उसके पद को कोई दूसरा व्यक्ति ग्रहण नहीं कर लेता है, तब तक इस दौरान राज्यपाल के पास उसकी सारी शक्तियां होती है, तथा वह दैनिक वेतन के आधार पर अपने पद पर नियुक्त रहता है।

निष्कर्ष

आशा है या आर्टिकल आपको बहुत पसंद आया हुआ इस आर्टिकल में हमने बताया (-) के बारे मे संपूर्ण जानकारी देने की कोशिश की है अगर यह जानकारी आपको अच्छी लगे तो आप अपने दोस्तों के साथ भी Share कर सकते हैं अगर आपको कोई भी Question हो तो आप हमें Comment कर सकते हैं हम आपका जवाब देने की कोशिश करेंगे।

FAQ

राज्यपाल का काम क्या होता है?

राज्य की कार्यपालिका का मुखिया राज्यपाल (गवर्नर) होता है, जो मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करता है। कुछ मामलों में राज्यपाल को विवेकाधिकार दिया गया है, ऐसे में वह मंत्रिपरिषद की सलाह के बिना भी कार्य करता है। राज्यपाल अपने राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति भी होते हैं।

गवर्नर किसे कहते हैं?

प्रत्येक राज्य में एक राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, जो उस राज्य का मुखिया होता है। जो सरकार का मुखिया होता है। राज्य में किए गए सभी कार्यों के लिए राज्यपाल की अनुमति लेना बहुत जरूरी है। राज्य में बिना अनुमति के कोई फैसला नहीं लिया जा सकता है। जो सभी निर्णय लेता है उसे राज्यपाल कहा जाता है।

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